ढिबरी by जयनारायण अनुज

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ढिबरी by जयनारायण अनुज

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Paperback – Bhojpuri

  • Publisher ‏ : ‎ hindi shree publication
  • Publication date ‏ : ‎ 9 August 2026
  • Edition ‏ : ‎ Standard Edition
  • Print length ‏ : ‎ 128 pages
  • ISBN-10 ‏ : ‎ 8169794005
  • ISBN-13 ‏ : ‎ 978-8169794008
  • Reading age ‏ : ‎ 3 years and up
  • Item Weight ‏ : ‎ 300 g
  • Dimensions ‏ : ‎ 14 x 22 x 2 cm
  • Country of Origin ‏ : ‎ India
  • Packer ‏ : ‎ Hindi Shree Publication
  • Generic Name ‏ : ‎ Printed Book

Availability: 5 in stock

SKU: 2026hsp05 Category: Tags: , , ,

ढिबरी by जयनारायण अनुज

ढिबरी विविधताओं से भरी है । इसमें तेल भी भरा है और बाती भी उच्च कोटि है । …. तो जाहिर है कि इसका प्रकाश भी उच्च कोटि का होगा । इसकी बाती के कहीं-कहीं लकठियाने का आभास होता है ….पर जरा सा उसका देने पर यह दोगुना उजाला देने लगती है । अनुज जी ने शुरुआत ही धमाकेदार कर दी है । एक नए कलेवर के गांव की कल्पना मात्र से ही मन रोमांचित हो जाता है । गांव के चित्र न पारंपरिक हैं । …न आधुनिक । वे अपने अंदर सम्यक दृष्टिकोण समेटे हैं । अनुज जी पर मनज जी की छाप स्पष्ट दृष्टिगोचर रहती है । यह स्वाभाविक भी है । दोनों सहोदर भाई हैं । ….और फिर यह अनुज जी का अधिकार भी है । वह मनज जी की तरह कान्हा से भी बात करते हैं । वे उसकी बंसी और चक्र दोनों का बखूबी प्रयोग करते हैं । अनुज जी गांव के कवि हैं । वे गांव के प्रतीकों का उपयोग बखूबी करना जानते हैं । प्रचलित कहावतों और लोकोक्तियों के माध्यम से अपनी बात करने में अनुज जी को महारत हासिल है । उन्होंने ऐसी ऐसी लुप्त प्राय हो चुकी लोकोक्तियों को ढूंढा है…. जिन्हें सुनकर रोमांचक अनुभूति होती है । इनका मानवीकरण करने की कला अगर सीखना है तो कोई अनुज जी से सीखे । लुप्त प्राय होती गुद्दी को सत्ता से जोड़कर जीवंत कर देना अपने आप में अनुपम है । अनुज जी के पास अपनी पीड़ा भी बहुत है।….तो उघटा पुरान भी होगा । अनुज जी पीड़ा का बखान भी बड़े सलीके से करते हैं । वे करते करते डूबने लगते हैं…। डूब इतना जाते हैं कि खुद की सुधि को भी भूल जाते हैं । यहीं पर उनकी पीड़ा का स्वरूप बदलने लगता है । उनकी पीड़ा उनकी न रहकर समग्र लोक की बन जाती है । ….और जब किसी की पीड़ा स्वयं की न होकर लोक की पीड़ा बन जाती है तो क्रांति में परिवर्तित होने लगती है । ऐसे में अनुज जी आगे बढ़कर क्रांति का नेतृत्व करने की भी क्षमता रखते हैं । इस काव्य संग्रह का जब आप अवलोकन करेंगे । …तो पाएंगे कि इसमें पनही भी हैं…कुकुर भी हैं और डोड़हा भी । पनहीं और कुकुर पर तो बहुत लोगों ने लिखा है । …पर डोड़हा पर मेरे संज्ञान में आज तक किसी ने कलम नहीं चलाई है । भाई अनुज जी इसके लिए धन्यवाद के पात्र हैं । संग्रह इतना सारगर्भित है कि अगर लिखा जाए तो एक समीक्षा ग्रंथ बन जाएगा । परंतु यहां यह विषय नहीं है । यह लोकार्पण के बाद विस्तृत रूप से किया जाएगा । यहां मेरा काम केवल संग्रह का परिचय देना है । इस संग्रह से आप सब को जोड़ना है । मुझे उम्मीद है कि आप सब ढिबरी की रोशनी में ढिबरी के एक-एक गीत को पढ़ेंगे…. गायेंगे….गुनगुनाएंगे.

Weight300 g
Dimensions22 × 15 × 2 cm

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