जनरेशन गैप by डॉ. जय प्रकाश प्रजापति
लघुकथा साहित्य की वह विशिष्ट विधा है जो ‘गागर में सागर’ भरने का कार्य करती है। न्यूनतम शब्दों में अधिकतम प्रभाव उत्पन्न करना और समाज की विसंगतियों पर सीधा व तीखा प्रहार करना इसका मूलधर्म है। एक सफल लघुकथा केवल किसी घटना का सरसरी वर्णन नहीं होती, बल्कि वह पाठक के मन में गहरा झंझावात उत्पन्न करती है। यह विधा अपनी संक्षिप्तता में भी पूर्ण होती है और जीवन के किसी एक मार्मिक या विद्रूप क्षण को पकड़कर उसे पूरी तीव्रता के साथ पाठक के सम्मुख प्रस्तुत कर देती है। डॉ. जय प्रकाश प्रजापति ‘अंकुश कानपुरी’ जी की लेखनी इसी मूलधर्म को पूरी प्रामाणिकता और निर्भीकता के साथ उकेरती है। एक कुशल लघुकथाकार के रूप में उनकी दृष्टि समाज के उस स्याह पक्ष को बेबाकी से उभारती है, जिसे हम प्रायः अनदेखा कर देते हैं। डॉ. प्रजापति केवल घटनाओं के मूक दृष्टा नहीं हैं, बल्कि एक सजग प्रहरी हैं। वे शब्दों की कृत्रिम सजावट की बजाय जीवन की स्याह सच्चाई को उसी रूप में प्रस्तुत करने का साहस करते हैं। उनकी रचनाओं में व्यंग्य तीक्ष्ण है और संवेदना गहरी है, जो प्रत्येक कथा में स्पष्ट रूप से परिलक्षित होती है।









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